बीज ने अपना समय लिया
निया दादाजी के साथ राजमा का एक बीज बोती है। हर सुबह वह गमला देखती है, पर मिट्टी पहले जैसी लगती है। “शायद यह बढ़ना भूल गया,” वह कहती है। दादाजी मुस्कराते हैं। “मिट्टी के नीचे क्या हो रहा है, यह देखे बिना भी हम इसकी देखभाल कर सकते हैं।” निया को दो उपाय सूझते हैं।
